आजादी की महत्ता

मैं भी आया हु आजादी का पर्व मनाने l
लोगो को इस दिन की महत्ता समझाने ll

ये ओ पावन दिन है जिसमे,हमनें आजादी ये पायी l
संघर्षों की तलवारों से हमने,गुलामी की जंजीर गिरायी ll

सुभाष लड़े, शेखर थे लड़े,लड़े थे भगतसिंह भाई l
दुर्गा लड़ी, अवन्ती थी लड़ी,लड़ी थी रानी लक्ष्मीबाई ll

भूल न जाओ तुम उनको,
इसलिए गाथा आया हु सुनाने l
मैं भी आया हु आजादी का पर्व मनाने,
लोगो को इस दिन की महत्ता समझाने ll

मुगलो कि सहे, अफ़गानो कि सहे,अंग्रेजो के क्रूर अत्याचार सहे l
एक दूजे अपने से लड़ते रहे,इसलिए गोरो कि हिम्मत थे बड़े ll

वीर सपूतो ने फिर भी हिम्मत न हारी,एक योद्धा सौ पर भारी पड़े l
देश द्रोहियों ने जब किये गद्दारी,इसलिए जीत के हार पाना पड़े ll

कौन थे मातृभक्त और कौन देशद्रोही,
आया हु मै तुम्हें तस्वीर दिखाने l
मैं भी आया हु आजादी का पर्व मनाने,
लोगो को इस दिन की महत्ता समझाने ll

वीर शिवा जी के शौर्य सब पहचाने,महाराणा के भुजबल में थी शक्ति भारी l
मानव ही नहीं पशु ने भी देशहित दिए जाने,तेजस जैसा चेतक महाराणा का सवारी ll

पर उसी कुल मे कुछ कायर हुए,मानसिंह, जयचंद, राघव जा शत्रु से मिले l
ये ही भारत के विभीषण हुए,जिनके कारण हमे स्वाधीनता जल्दी न मिले ll

देश के इस रण छत्तीसगढ़ के भी वीर थे,
उनका नाम तुमको आया हु बताने l
मैं भी आया हु आजादी का पर्व मनाने,
लोगो को इस दिन की महत्ता समझाने ll

सोनाखान की धरती को कैसे भूले, वीर नारायण का गाथा वहा है छुपा l
आदि वासी युवा वीर गुणडधुर थे, जो स्वाभिमान बचाने इस रण घुसा ll

हनुमान सिंग नाम का था सिपाही, छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहलाया l
बस्तर में थे मुरिया नाम जनजाति, जिसने हमारी हरयाली को बचाया ll

भारत के वीर गाथाओं की सीमा नहीं,
जय हिंद बोल चलो तिरंगा फहराने l
मैं भी आया हु आजादी का पर्व मनाने,
लोगो को इस दिन की महत्ता समझाने ll

@स्वरचित रचना ”गीत ” @
कुलेश्वर जायसवाल
नवकलमकार साहित्य मंच कवर्धा